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Allahpathy:THE BLESSING MONEY BAG THAT WOULD HELP EVERYONE TO BE RICH IN THE MONTH OF RAMADAN

By Hazrat Hakeem Mohammad Tariq Mahmood Chughtai Dear Readers! I Bring to you precious pearls and do not hide anything, you shou...

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Sunday, September 9, 2018

Ayyubpathy कैंसर का इलाज क़ुरआन और पानी से, नीयत और ख़ुशी के साथ

यह आज साइंटिफ़िक फ़ैक्ट है कि
1. पानी एक best natural medicine है।
2. और यक़ीन भी हेल्दी होने में मदद करता है।
सभी हकीम डॉक्टर पानी से इलाज करते हैं। हरेक दवा का सबसे ज़्यादा हिस्सा पानी होता है। पानी के बिना किसी दवा का वुजूद मुमकिन नहीं है।

Dr. Anwer Jamal
Tibbe Nabawi
email:allahpathy@gmail.com

*Hydropathy* को मैं *Ayyubpathy* कहता हूं क्योंकि पवित्र क़ुरआन में है कि 
नबी अय्यूब अलैहिस्सलाम ‌अल्लाह के हुक्म से शिफ़ा के यक़ीन के साथ पानी पी कर ही हेल्दी हुए थे।
وَأَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ أَنِّي مَسَّنِيَ الضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ الرَّاحِمِينَ ﴿٨٣﴾ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَكَشَفْنَا مَا بِهِ مِن ضُرٍّ
और अय्यूब पर भी दया दर्शाई। याद करो जबकि उसने अपने रब को पुकारा कि "मुझे बहुत तकलीफ़ पहुँची है, और तू सबसे बढ़कर दयावान है। अतः हमने उसकी सुन ली और जिस तकलीफ़ में वह पड़ा था उसको दूर कर दिया।
पवित्र क़ुरआन 21:83-84
 ارْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَـٰذَا مُغْتَسَلٌ بَارِدٌ وَشَرَابٌ ﴿٤٢﴾
"अपना पाँव (धरती पर) मार, यह है ठंडा (पानी) नहाने को और पीने को।"
क़ुरआन 38:42
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किसी दीनी ख़िदमत और धर्म प्रचार में लगे भाई बहन इस Ayyubpathy की प्रैक्टिस करके ज़रूरतमंदों की सेवा कर सकते हैं और साथ ही वे अपने घर परिवार की ज़िम्मेदारियों को पूरा करने के लिए काफ़ी माल भी कमा सकते हैं। यह कमाई दीनी नज़र से पूरी तरह जायज़ है।
🌹🌿🌹
इस तरह अल्लाह ने इंसान को पानी के रूप में दवा भी दी है और उन्हें रोज़गार के भरपूर मौक़े भी दिए हैं।
Dawah for Wellness सिखाना ही मेरा यानि डा. अनवर जमाल का काम है।
🌿💚🌿
आप रब के कलाम से लोगों का भला करें।
लोगों को फ़ायदा मिलेगा तो वे आपकी बात मानेंगे।
आप लोगों को रब के कलाम से दुनिया में फ़लाह और कल्याण पाना सिखाएं क्योंकि जिससे लोगों को फ़ायदा होता है, लोग उसी की बात मानते हैं।
وَجَعَلْنَا مِنَ الْمَاءِ كُلَّ شَيْءٍ حَيٍّ
और हमने पानी से हर जीवित चीज़ बनाई क़ुरआन 21:30
water यानि पानी हमारे जीवन का आधार ही नहीं, एक बेहतरीन दवा भी है। इसके सही यूज़ से हम न केवल हेल्दी रह सकते हैं बल्कि ज़्यादातर बीमारियों से आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। ज़्यादातर लोग पानी जैसी नेमत का शुक्र नहीं करते, उसका सही यूज़ नहीं करते और वे इस नाशुक्री की वजह से बीमार रहते हैं और कष्ट उठाते हैं।

इसलिए आप सबसे पहले रब के शुक्रगुज़ार बनें और फिर सही तरीक़े से पानी पिएं। जहाँ तक मुमकिन हो पानी क़ुदरती तौर से ठंडा हो। बर्फ़ का और फ़्रिज का ठंडा पानी पीने से आपका लिवर ठंड का शिकार हो जाएगा। जिससे वह ठीक से खाना हज़्म न कर पाएगा। तब न आपमें ताज़ा हेल्दी ख़ून बनेगा और न ही आपको एनर्जी मिलेगी। आप थकान और तनाव के शिकार हो जाएंगे। आप पति पत्नी के रूप में भी कमज़ोर पड़ जाएंगे। गर्मी के मौसम में घड़े या सुराही का पानी पिएं। इससे पानी का TDS सही रहेगा, जो  जाकि और आपकी हेल्थ के लिए लाज़िमी है। सर्दी के दिनों में मिट्टी, लकड़ी और किसी मेटल के प्याले में रखा हुआ पानी पीना सबसे अच्छा है।  अधिक ठंड में गुनगुना गर्म पानी भी पिया जा सकता है। प्लास्टिक के बर्तन में गर्म पानी पीना ज़हर पीना है।
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हमें यह जानना चाहिए कि कब जल पीना चाहिए और कब नहीं?
1. सुबह उठते ही डेढ़-दो गिलास ताज़ा या गुनगुना गर्म पानी पियें। जिन्हें पेट साफ़ न होने की शिकायत हो तो वे उसमें एक चम्मच त्रिफला और एक चम्मच शहद मिलाकर हल्के गर्म पानी से लें।
ज़्यादा क़ब़्ज़ हो तो बाज़ार से हमदर्दकी दवा जवारिश कमूनी मुसहिल लेकर एक चम्मच और मिला लें।
2. हाज़्मे के लिए खाने के बीच में सादा पानी पीने बजाय उसमें शहद, नींबू और सेब का सिरका या कोई भी सिरका मिलाकर थोड़ा थोड़ा करके पिएं। डायबिटीज़ के मरीज़ शहद न मिलाएं।
3. इसके बाद दिन भर आधा घंटे बाद थोड़ा पानी पीते रहें। इस प्रकार आप दिन भर में तीन से चार लीटर पानी आसानी से पी लेंगे। 18 kg. वज़्न पर 1 लीटर पानी की ज़रूरत पड़ती है। इस तरह आप अपने वज़्न के हिसाब ‌‌‌‌से अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ ज़रूर पानी पिएं। इस से आपको बार पेशाब आएगा। इससे घबराना नहीं है। यह आपके लिए बहुत अच्छा है। आपकी body के toxins बाहर निकलेंगे। जो कम पानी पीने वालों के अंदर रहते हैं और उनके सड़ने से आप बीमार पड़ते हैं। इसी सड़‌न से पसीने में बदबू आती है।
जो लोग बार बार पेशाब आने  बचने  पानी पीना कम कर देते हैं, वे अपनी जान पर खुद ही ज़ुल्म करते हैं.
4. खाने से लगभग एक घंटा पहले पानी पियें। खाने के लगभग एक घंटा बाद पानी पियें।
5. रात को सोने से पहले आधा गिलास पानी ज़रूर पियें। अपने पास पानी रखकर सोएं। रात को जब आंख खुले, तब भी थोड़ा पानी ज़रूर पी लें।
6. गर्मियों में घर से बाहर निकलने से पहले पानी ज़रूर पियें। आम दिनों में भी ऐसा किया जा सकता है।
7. टहलने या Exercise करने और नमाज़ के लिए निकलने से पहले थोड़ा जल ज़रूर पियें और इनके बाद थोड़ा ठहरकर भी एक गिलास पानी ज़रूर पियें।
8. एक सुनहरा नियम यह है कि जब आपको प्यास लगे, तब पानी ज़रूर पियें और आप बिना प्यास के भी पानी पिएं।

पानी कब न पियें?
1. जब आप बाहर से लौटे हों और बहुत पसीना आ रहा हो, तो फ़ौरन पानी न पियें, बल्कि कम से कम 10 मिनट आराम करने के बाद ही पियें। दौड़ कर जब रूकें और सांस फूल रहा हो, तब पानी न पिएं जब तक आपका सांस नार्मल न हो जाए।
2. खाने के फ़ौरन बाद पानी पीना बहुत नुक़्सान देता है। उस वक़्त सिर्फ़ पानी से मुँह साफ़ कर लें और बस एक या दो घूँट पानी पी लें।
3. Toilet से आने के 10 मिनट बाद पानी पिया जा सकता है।
4. कोई रसीला फल खाने या दूध पीने के फ़ौरन बाद भी पानी न पियें. इसके 10 मिनट बाद पानी पिया जा सकता है.

रब का नाम लें
1. जब भी पानी पिएं तो रब का नाम लें और मस्नून दुआ पढ़कर पानी पिएं। इससे आप जो vibrations पैदा करते हैं, पानी उसकी सकारात्मक ऊर्जा लेकर अंदर जाता है और Blood Cells की Healing तेज़ होती है और DNA में सुधार होता है। जिससे नेक फ़रमांबरदार (आज्ञाकारी) औलाद/नस्ल पैदा होती है।
2. पानी पीने के बाद भी शुक्र और मस्नून दुआ करें।
मस्नून‌ दुआएं इंटरनेट पर हैं।
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कोल्ड ड्रिंक्स भूल कर भी न पिएं। 
जिन शर्बतों में  बाज़ारी फ़ूड में preservative के तौर पर कोई केमिकल हो, उन्हें भी न पिएं। ये आपके लिए ज़हर हैं. 
आप जो भी खाएं और पिएं , वह आपके अंदर ताज़ा खून बनने में मदद हो तो ही आप उसे लें. 
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*कैंसर जैसी बीमारी का इलाज*
अगर आप अल्लाह शिफ़ा के निज़ाम को जान लेंगे आप हरेक बीमारी से शिफ़ा पा सकते हैं.
आप यूट्यूब पर देखेंगे कि
क़ुरआन के पाठ से और विश्वास की शक्ति से बहुत लोग कैंसर जैसी जटिल बीमारियों से चंगे हो चुके हैं।
आप सूरह फ़ातिहा और क़ुरआन की आयतें पढ़कर किसी बोतल के पानी पर फूंक दें। आप ख़ुद ऐसा न कर सकें तो कोई दूसरा भी मरीज़ के लिए ऐसा कर सकता है। क़ुरआन पढ़ते वक़्त मरीज़ को अपने दिल में हेल्दी और ख़ुश देखें, जो कि नीयत है। सुबह शाम ऐसा करें। इससे Health & Happiness की vibrations आपके जिस्म में पैदा होंगी और वे उस पानी पर असर करेंगी।
इसी पानी को ज़रूरत के वक़्त पिएं!
इससे Body की Frequency ऊपर उठती है। पानी हरेक Body Cell को आपकी नीयत के मुताबिक़ Heal करना शुरू कर देगा।
इससे oxygen level भी बढ़ेगा। जिस्म का  Oxygen level सही हो तो Cancer cells ख़ुद ही Destroy हो जाती हैं। Bio Oxidative Therapy इसी नियम पर कैंसर का इलाज करती है।
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36% Food Grade Hydrogen peroxide से पानी को पाक करके पिया जाए तो उसमें oxygen का लेवल और ज़्यादा बढ़ जाता है। जिससे cancer cells नष्ट हो जाती हैं।
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 आपको जानकर ताज्जुब होगा कि हमारे ख़ून में white blood cells के पास सबसे बड़ा क़ुदरती हथियार hydrogen peroxide का ही होता है। जिससे ये शरीर के सब दुश्मनों का ख़ात्मा करने में सक्षम हैं।
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जिन बीमारियों को  Allopathy में लाइलाज माना है और उन कोई दवा काम नहीं करती, उसकी असल वजह यह होती है कि उनकी जड़ तन में नहीं बल्कि मन में होती है. उन्हें उन सब लोगों को माफ़ करने की ज़रूरत है, जिनसे वे मरीज़ नाराज़ हैं. जिसे माफ़ करना सबसे ज़्यादा मुश्किल लगे, उसे सबसे पहले माफ़ करें. उसके ख़िलाफ़  आपके दिल में जो ग़म , ग़ुस्सा और नाराज़गी है, उसने आपके दिल को बीमार कर  दिया है. फिर वह बीमारी दिल से जिस्म में ज़ाहिर हो गई है. माफ़ी और दुश्मन से मुहब्बत आपके दिल  पाक करती है, आप आप नबियों की तरह अपने दुश्मनों की हिदायत और भलाई के लिए दुआएं करें बहुत ज़्यादा करें. इससे आपके दिल का दिल का रोग मिट जायेगा जोकि जिसमानी बीमारी की असल जड़ है. 
इस राज़ को ख़ूब  अच्छी तरह समझ लें ताकि आप शिफ़ा पाएँ। 
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आसमान से बरसने वाले पानी को अल्लाह ने क़ुरआन (25:48) में माअन तहूरा यानि पवित्रतम जल, सबसे ज़्यादा पाक पानी कहा है।
हमने सबसे ज़्यादा पाक पानी पर बरसों रिसर्च की तो हमें उसमें हाइड्रोजन परआक्साईड मिला, जो पानी को पाक बनाता है।
आपके हंसने से भी आपका ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है। आपको पूरे दिन में थोड़ा थोड़ा करके 18 मिनट हंसने की ज़रूरत है।
इस्लाम में सहाबा र. और बुज़ुर्गों के रोने के क़िस्से इतने मशहूर हो गए हैं कि यह बात लोग भूल चुके हैं कि हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु के मुबारक होंठ हर वक़्त मुस्कुराहट से खिले रहते थे।
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आप अपने ऊपर हर वक़्त बरसती हुई नेमतों को देखेंगे और रब को अपने साथ महसूस करेंगे तो आप भी अपने दिल में हर वक़्त ख़ुशी महसूस करेंगे। यही ख़ुशी आपसे दुख को दूर रखेगी क्योंकि जैसा आप अपने अंदर महसूस करेंगे, आपके जिस्म में वैसे ही vibrations पैदा होंगे। फिर उन vibrations से वही हालत मैटीरियलाईज़ हो जाएगी। आप अपने दिल में रब से राज़ी और ख़ुश रहने की आदत बना लेंगे तो आपको बाहर भी नेचुरली खुशहाली और सेहत नसीब होगी.



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आप क़ुदरत के इन नियमों पर समझदारी के साथ अमल करेंगे, तो यक़ीन और पानी का पूरा फ़ायदा आपको मिलेगा और आप हमेशा हेल्दी रहेंगे।
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आप पानी की study करें।
पानी रब की रहमत है।
आप रब की रहमत से सबका इलाज करें।
🌸🌼🌸
देश के बेरोज़गार युवा, दाई, हाफ़िज़, इमाम, मुअज़्ज़िन, मौलवी, पादरी, पंडित और घरेलू औरतें ऐसा कर लें तो वे एक साल में ही हकीम बन सकते हैं।
वे किसी सेंटर से नेचुरोपैथी का डिप्लोमा और डिग्री कोर्स भी कर सकते हैं।
हम अपनी 30 साल की रिसर्च आपको एक दिन में सौंप सकते हैं। जिससे आप 5,000 रूपए से 50,000 रूपए तक हर महीने बिना किसी दुकान के कमा सकते हैं।
अल्हम्दुलिल्लाह!
🌿🌿🌿🕊🕊🕊
इस तरह आप रब की दी हुई हिकमत से दावती और फ़लाही काम के साथ देश से बेरोज़गारी और ग़रीबी को भी दूर कर सकते हैं।
देश में करोड़ों बेरोज़गार उसके पीछे चलने को तैयार बैठे हैं जो उन्हें नेकी के साथ कमाना सिखा दे।
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देश के नौजवान नेताओं के पीछे इसीलिए तो चलते हैं कि वे उनसे रोज़गार का वादा करते हैं।
किसी नेता का वादा झूठा हो सकता है लेकिन अल्लाह का वादा सच्चा है। अल्लाह लोगों को रोज़ी देने का वादा करता है। पानी आपकी रोज़ी है। पानी से भी आपकी रोज़ी है। यह एक साइंटिफिक फ़ैक्ट है। 
पानी को अब दवा बनाएं और भरपूर कमाएं।
आप Ayyubpathy से ऐसा आसानी से कर सकते हैं।

Friday, August 25, 2017

how to make a wish come true fast

काफ़ी जानकारी पिछली पोस्ट्स में दी है ... अब आगे पढ़ें-

आप अपने जीवनसाथी में किन ख़ूबियों को देखना चाहते हैं?
        ज़्यादातर लड़के लड़कियों का विज़न इस बारे में धुंधला होता है। वे कहते हैं कि वे एक अच्छा जीवनसाथी चाहते हैं जो उन्हें प्यार करे। ‘अच्छा जीवनसाथी’, यह एक साफ़ विज़न नहीं है। आपका जीवनसाथी किस बात में अच्छा हो?, यह आपको बिल्कुल साफ़ पता होना चाहिए।
आप लड़कियों से पूछें कि अच्छे जीवनसाथी से आपका क्या मतलब है?, तो वे जवाब देंगी कि जो शराब न पीता हो, जो धौंस न जमाता हो, ग़ुस्सा न करता हो, मारपीट न करता हो, गालियां न देता हो, जो दूसरी लड़कियों के चक्कर में न पड़े।
        ये सब नेगेटिव जवाब हैं। आप एक पेपर पर एक कॉलम में ये सब लिख लें और फिर दूसरे कॉलम में हरेक नेगेटिव जवाब को पॉजि़टिव जवाब से बदल दें।



Clarity is your power
आप इसमें और ज़्यादा ख़ूबियां जोड़ सकती हैं जैसे कि आपका पति डॉक्टर, इंजीनियर या बिज़नेसमैन हो या जो भी आप चाहें। उसके पास अपना घर हो। वह शहर, क़स्बे या देहात में रहता हो, जो भी आपको पसन्द हो। उसका रंग साफ़ हो। उसका क़द 5 फ़ुट 9 इंच हो, या जितना क़द आप पसन्द करें। वह किस तरह के कपड़े पहनता हो? वह किस जाति का हो? यह सब भी लिख लें। आप जिस जिस जाति में शादी कर सकती हैं, उन जातियों के नाम भी लिख लें। अगर आप किसी भी जाति में शादी कर सकती हैं तो आप यह भी लिख लें। ऐसे ही आप अपने पति के धर्म और मत को भी लिख लें। आप जितनी ज़्यादा ख़ूबियों को पॉज़िटिव तरीक़े से लिखती जाएंगी, आपका अपने पति के बारे विज़न उतना ही ज़्यादा साफ़ होता जाएगा। यहां तक कि आप अपने दिल के आईने में अपने पति की इमेज को ऐसे ही बिल्कुल साफ़ देख पाएंगी, जैसे कि आप किसी की इमेज आईने में देखती हैं।
दिल के आईने में है तस्वीरे यार
जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली
ऐसे ही लड़के भी अपनी होने वाली पत्नी में जिन ख़ूबियों को देखना चाहते हैं, उन्हें एक पेपर पर ज़रूर लिख लें ताकि उनका विज़न अपनी पत्नी के बारे में क्लियर हो जाए। यह किसी दूसरे पर क्लियर नहीं करना है बल्कि ख़ुद अपने माइन्ड में ही क्लियर करना है ताकि आपका सब्काॅन्शियस माइन्ड आपकी पसन्द के जीवनसाथी को आपकी ज़िन्दगी में अट्रैक्ट कर सके।
असमा हूर ने इसी तरीक़े से अपनी ज़िन्दगी में एक ख़ूबसूरत, शिक्षित, कमाऊ और वफ़ादार शौहर को अट्रैक्ट कर चुकी हैं।

एक दूसरे से प्रेम करो 
असमा हूर की शादी डा. नदीम हाशमी सेहुई, जो कि मेरे अच्छे दोस्त हैं। दोनों दुनिया भर में पीतल के बर्तनों के लिए मशहूर मुरादाबाद शहर के रहने वाले हैं।डा. नदीम लम्बे क़द की लड़की से निकाह करना चाहते थे। इन्डिया में आम तौर पर 5 फ़ुट 4 इन्च क़द तक की लड़कियाँ ज़्यादा मिलती हैं। लम्बे लड़की की तलाश की वजह शादी में वक़्त लग रहा था। लोग डा. नदीम से पूछते थे तो वह हंसते हुए कह देते थे कि अब तो मैं हूर से शादी करूंगा। उनकी शादी 5 फ़ुट 8 इन्च क़द की असमा हूर से हो गई। शादी के बाद असमा ने अपना नाम बदलकर असमा नदीम कर लिया।
शादी के बाद मैं एक दिन डा. नदीम हाशमी के घर पहुंचा तो उन्होंने मुझे अपनी पत्नी असमा से मिलवाया। मैंने असमा में भी ख़ूबसूरती के साथ वे सब ख़ूबियां देखीं, जो ज़िन्दगी में ख़ुशी और कामयाबी पाने के लिए ज़रूरी हैं।  पति पत्नी में गहरी मुहब्बत हो तो इन्सान का घर ज़मीन पर ही जन्नत बन जाता है। सबसेअच्छी बात यह है कि दो बच्चे हो जाने के बाद आज भी  दोनों में बहुत गहरी मुहब्बत है। मैंने दोनों को क़ानूने क़ुदरत का इल्म दिया है। इस इल्मो हिकमत को मैं ‘अल्लाहपैथी’ कहता हूं। इस की मदद से दोनों ने बहुत ख़ुशियाँ और बरकतें पाई हैं। जो तरीक़ा मैंने उन्हें सिखाया, उसने उन्हें बहुत जल्दी अच्छे नतीजे दिए क्योंकि यह तरीक़ा उन लोगों के लिए बहुत तेज़ी से काम करता है, जो कि मुहब्बत से बहुत ज़्यादा भरे होते हैं। इतने ज़्यादा कि मुहब्बत उनके व्यवहार में सेवा और मदद के रूप में लगातार बहती और छलकती हो।
Love each other -Jesus Christ, John 15:17

         असमा नदीम ने मुझे बताया कि किसी की सलाह पर उन्होंने शादी से पहले अपनी एक डायरी में वे ख़ूबियां लिख ली थीं, जिन्हें वे अपने शौहर में देखना चाहती थीं। यहां तक कि उन्होंने यह भी लिख दिया था कि उनके पति के चेहरे पर छोटी सी दाढ़ी हो। फिर जब उनकी शादी हुई तो उन्होंने देखा कि उनके शौहर में वे सब ख़ूबियां थीं, जो कि उन्होंने अपनी डायरी में लिखी थीं, यहां तक कि उनके शौहर के चेहरे पर छोटी सी दाढ़ी भी थी। उनका पति उनके पूरे ख़ानदान की लड़कियों के पतियों में सबसे ज़्यादा शिक्षित है, जैसा कि वह चाहती थीं। उनकी शादी इन्डिया के आम रिवाज के मुताबिक़ उनके घरवालों ने ही तय की थी। लड़के वाले दूसरी जाति के थे। लड़के वाले ख़ुद उनके घर रिश्ता लेकर आए थे। मुरादाबाद में उन दो अलग जातियों में शादी की यह पहली घटना थी। सम्भावना के हिसाब से ऐसा होना तक़रीबन नामुमकिन था लेकिन फिर भी यह सब हुआ। यह सब क़ुदरती क़ानून के तहत हुआ। असमा किसी शादी में जाती थीं तो सब लड़कियाँ बड़े शौक़ से दहेज के सामान को देखती थीं। असमा दहेज का सामान देखने में कोई दिलचस्पी नहीं लेती थीं। उन्हें ऐसा पति मिला, जिसने आम रिवाज के खि़लाफ़ अपनी शादी में उनके वालिद से दहेज लेने से मना कर दिया। असमा का निकाह बिना दहेज के हुआ। जब आप अपनी नीयत में साफ़ होते हैं तो फिर उस नीयत की वजह से यूनिवर्सल एनर्जी में सभी ज़रूरी बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। जिससे उस नीयत के पूरा होने के असबाब बनते हैं और वह नीयत नेचुरली पूरी हो जाती है।

अपना घर कैसे पाएं?
        मैंने पहली मुलाक़ात में अमा नदीम से कहा कि आप मेरी बहन हैं। बताईये आप क्या चाहती हैं?
तब असमा नदीम दो कमरों के एक मकान में संयुक्त परिवार में रहती थीं। ज़ाहिर है कि सास, ससुर, देवर, ननदों और मेहमानों के लिए एक कमरा कम पड़ता था। वह बोलीं कि मैं एक नया घर चाहती हूं।
      मैंने उनसे कहा कि यह रब के लिए बहुत आसान है। आप जैसा घर चाहती हैं। आप उसके बारे में अपना विज़न क्लियर कीजिए। आप उस घर में कितने कमरे चाहती हैं? जो भी आप चाहती हैं, आप एक चार्ट पर उस घर का नक़्शा बना लीजिए। उस नक़्शे को आप अपने कमरे में एक दीवार पर टांग लीजिए। फिर आप मेन्टली उस घर में रहना शुरू कर दीजिए। आप अपने दिल के आईने में देखिए कि उस घर में किस तरह की सजावट है? उसकी दीवारों पर किस रंग का पेन्ट है। जब आप रात को सोने लगें तो आप यही महसूस करें कि आप ‘उसी घर’ में सो रही हैं। जब आप इस घर के किचन में काम करें तब भी आप यही कल्पना करें कि आप ‘उसी घर’ के किचन में काम कर रही हैं। इन शा अल्लाह, बहुत जल्दी आपकी ज़िन्दगी में ऐसे हालात बनेंगे कि वह घर आपको नेचुरली मिल जाएगा।



       असमा नदीम ने एक चार्ट पर अपने घर का नक़्शा बना कर उसे दीवार पर लगा दिया और वह मेन्टली उसमें रहने लगीं। यह रब से गुमान करने का एक तरीक़ा है। एक रोज़ उनके कमरे में उनके एक ननदोई अख़्तर हुसैनने वह नक़्शा देखकर पूछा कि यह क्या है?
        असमा नदीम बोलीं कि यह हमारे घर का नक़्शा है तो अख़्तर हुसैनबहुत हंसे। वह बोले, अरे इसमें तो कार खड़ी करने के लिए पोर्च भी है। शायद उन्हें यह मुममिन नहीं लगा था। अक्सर लोग अपने हालात को देखकर अपनी कल्पनाओं का साईज़ छोटा कर लेते हैं। जिससे वे एक जैसे ही हालात में गोल गोल घूमते रहते हैं। जब भी आपको अपनी ज़िन्दगी में कुछ नया और कुछ बड़ा चाहिए तो सबसे पहले आपको वह चीज़ अपनी चेतना में एक कल्पना के रूप में पानी होगी। इस तरीक़े से आप अपने विश्वास के अनुरूप जो चाहे पा सकते हैं।
बहुत जल्दी, 8-9 माह में ही ऐसे हालात बने कि असमा नदीम ने एक प्लाॅट ख़रीद लिया। हुआ यह कि असमा के पिता ने अपनी बेटियों और अपने बेटे के नाम बचपन में ही एक रक़म फ़िक्स्ड डिपाॅज़िट कर दी थी।जिसका पता बच्चों में से किसी को नहीं था। उन्हें किसी ने बताया कि इस्लामी क़ानून के मुताबिक़ फ़िक्स्ड डिपाॅज़िट करके ब्याज लेना जायज़ नहीं है। यह सुनकर उन्होंने अपनी एफ़डी ख़त्म कर दी।असमा को इसका भी पता न चला। उन्हें अपनी नीयत और शरीयत के मुताबिक़ सभी बच्चों को उनके हिस्से की रक़म देनी थी। उन्होंने रक़म की हिफ़ाज़त और फ़ायदे के लिए सभी बच्चों के नाम से ज़मीन ख़रीद ली। उन्होंने असमा और डा. नदीम की पसन्द से एक अच्छी लोकेशन पर एक प्लाॅट की रजिस्ट्री असमा के नाम करवा दी।असमा ने या डा. नदीम ने उनसे मकान के लिए कोई मदद नहीं माँगी थी। उनकी नीयत, गुमान और समर्पण के बाद ख़ुद ऐसे हालात बने कि उनके बिना माँगे उन्हें एक प्लाॅट नेचुरली ख़ुद मिल गया। प्लाॅट मिला तो डा. नदीम हाशमी के लिए इतनी रक़म का बन्दोबस्त दूसरी जगह से हो गया, जिससे उन्होंने उस प्लाॅट पर फ़ौरन ही एक अच्छाऔर बड़ा मकान बनाना शुरू कर दिया। मकान में तामीर अभी चल रही है। एक दिन डा. नदीम हाशमी ने मुझे यह मकान दिखाया तो उन्होंने इसमें कार खड़ी करने की जगह भी दिखाई, जैसे कि नक़्शे में थी। प्लाॅट ख़रीदने और उसे बनाने के ये सब काम ऐसे वक़्त में हुए जबकि डा. नदीम हाशमी केक्लीनिक की आमदनी से ये काम होने नामुमकिन लगते थे। मुझे बहुत ख़ुशी हुई। मैंने उस मकान को बरकत की दुआ दी। अपनी कल्पना में उस मकान के आस पास अच्छे पड़ोसियों के आबाद होने का मन्ज़र भी देखा।
असमा नदीम ने जिस घर में बैठ कर हमसे एक नए घर के लिए कहा था। हमने उस घर को भी अपनी कल्पना में उसी वक़्त क़ानूने क़ुदरत के मुताबिक़ बड़ा देखा था। सन 2017 में डा. नदीम हाशमी के वालिदजनाब मुराद हुसैन हाशमी ने उस मकान में काफ़ी रूपया लगाया। उसके ऊपर एक मन्ज़िल और बना ली। जिससे नीचे के कमरे भी काफ़ी बड़े हो गए। एक दिन जब मैं उनके घर गया। तब उनके वालिद साहब ने मुझसे बहुत ख़ुशी के साथ कहा कि अब आप यहां आना और ख़ूब ठहरना। उन्होंने उस मकान में पत्थर का बहुत अच्छा काम करवाया है। इस घर के हर ज़र्रे में मैंने मुहब्बत महसूस की है। जब भी मैं इस फ़ैमिली से मिलता हूँ, मेरी ख़ुशी में इज़ाफ़ा होता है।मुहब्बत और ख़ुशी का चर्चा मैं बार बार इसलिए कर रहा हूं ताकि आप जान लें कि मुहब्बत और ख़ुशी की ताक़त से ही आपके हालात आपके माफ़िक़ हो सकते हैं।
Asma Nadeem with Dr. Nadeem Hashmi

      इस बीच डा. नदीम हाशमी ने Life Deginn School शुरू कर दिया।जिसे वह असमा नदीम के साथ मिलकर संभालते हैं। उनके पूछने पर स्कूल के लिए नाम मैंने ही सुझाया था। यह काॅन्सेप्ट और सिलेबस के ऐतबार से मुरादाबाद में अपनी तरह का अकेला स्कूल है। तालीम और स्टैन्डर्ड के लिए यह स्कूल पहले दिन से पहचाना जाता है। स्कूल में एडमिशन के लिए पेरेन्ट्स की इतनी भीड़ लगती है कि सीटें बहुत जल्दी पूरी हो जाती हैं और बाक़ी लोगों को मना करना पड़ता है। डा. नदीम हाशमी अपने स्कूल के लिए भी एक ज़्यादा बड़ी बिल्डिंग का इन्तेज़ाम करने की ‘सोच’ रहे हैं।
Asma Nadeem with Dr. Nadeem Hashmi in Life Design School Moradabad India
        इस तेज़ तरक़्क़ी को देख कर एक दो लोगों ने अपने नेगेटिव एटीट्यूड को खुलकर ज़ाहिर किया। जलन और दुश्मनी के जज़्बे में वे जो कर सकते थे, उन्होंने किया। यह भी अपने अन्दर के प्रतिरोध का ही एक रूप होता है, जो बाहर के हालात में ज़ाहिर होता है। डा. नदीम हाशमी और असमा नदीम ने उन्हें भी अपने पाॅज़िटिव एटीट्यूड से पस्त कर दिया।

        असमा नदीम अपनी माइन्ड पाॅवर के ये हैरतअंगेज़ नतीजे देखकर इतनी ज़्यादा जोश में आईं कि उन्होंने व्हाट्स एप पर अपनी रिश्तेदार लड़कियों के लिए एक अलग ग्रुप बना डाला। फिर हमसे बोलीं कि प्लीज़ आप इसमें ‘अल्लाहपैथी’ के नियम सिखाएं ताकि सब लड़कियों का भला हो। हमने इस ग्रुप में भी अदा को शामिल कर दिया और असमा नदीम से कहा कि प्लीज़ आप इस ग्रुप में अपना वह ख़ास तरीक़ा बताएं, जिससे शौहर के बारे में विज़न क्लियर होता है।
---जारी 

Tuesday, July 4, 2017

वशीकरण और मुहब्बत का पाॅवरफ़ुल अमल Muhabbat ka powerful amal

कई बार लड़कियों से शादी का वादा करके उनका महबूब धोखा दे देता है। वे तड़पती हुई रह जाती हैं। विधवाओं के साथ भी ऐसे धोखे होते हैं। वे कहीं मदद के लिए फ़रियाद भी नहीं कर पातीं और न ही अपना दुख किसी को बता पाती हैं।  आजकल लिव इन रिलेशनशिप के नाम पर भी लड़कियों के यौन शोषण और लड़कों से धोखेबाज़ी हो रही है। ज़रा ज़रा सी बात पर ब्रेक अप हो रहे हैं।
कुछ औरतों और मर्दों को भी अपनी ज़िन्दगी में शादी के बाद ऐसा वक़्त देखना पड़ता है, जब उनका जीवन साथी उन्हें छोड़ देता है या छोड़ने की धमकी देता है या उनसे मुहब्बत नहीं करता। ऐसे वक़्त में वे ख़ुद को बिल्कुल बेबस पाते हैं। वे सोचते हैं कि काश! हमारे पास कोई ऐसी ताक़त होती तो हम उसे अपनी मुहब्बत में गिरफ़्तार कर लेते। हम अपना घर बचा लेते।
ऐसे ही लोगों को हम यह बताना चाहते हैं कि अल्लाह ने आपको ज़बर्दस्त ताक़त के साथ ही पैदा किया है ताकि आप ख़ुश रह सकें और शुक्र करे। आपके चारों तरफ़ अथाह एनर्जी फैली हुई है। यह सारा यूनिवर्स ज़बर्दस्त एनर्जी से भरा हुआ है। आपके पास नमाज़ और क़ुरआन है, आपके पास बहुत ज़बर्दस्त ताक़त है।
1. नीयत,    2. यक़ीन और तसव्वुर (imagination/visualization)   आपके अन्दर की रूहानी ताक़तें हैं।
जब आप रूहानी ताक़त के साथ नमाज़ और क़ुरआन पढ़ते हैं तो आप अपनी ज़बर्दस्त ताक़त से काम लेते हैं। यूनिवर्सल एनर्जी आपके तसव्वुर (कल्पना) पर प्रतिक्रिया करती है। आपका दिल अपनी मुराद पूरी होने के असबाब खींचता है। आप उन असबाब से काम लेते हैं और आपकी मुराद पूरी हो जाती है। हरेक के लिए उसके हालात के मुताबिक़ ग़ैब से अलग असबाब बनते हैं।
जैसा आपका यक़ीन होता है, आपके दिल में वैसा ही तसव्वुर यानि इमेज बनती है। आप हर वक़्त अपने दिल में ख़ुद से बातें करते रहते हैं और माइन्ड मूवी देखते रहते हैं। यही आपका यक़ीन होता है। अक्सर लोगों के दिल में अपने महबूब को लेकर डर होता है और वे अपने दिल में बुरे बुरे तसव्वुर करते रहते हैं। बाद में उनका डर सच हो जाता है और वे कहते हैं कि हमें पहले ही इस बात का डर था। सो किसी भी रूहानी अमल में कामयाबी के लिए अपने दिल को डर से और बुरे तसव्वुर से पाक करना बहुत ज़रूरी है। हमेशा अल्लाह की ताक़त के भरोसे पर अच्छा तसव्वुर करने की आदत डालें। अल्लाह से अच्छाई की उम्मीद ही रखें। आपकी ज़िन्दगी संवर जाएगी।
जायज़ मुहब्बत के लिए आज हम तस्ख़ीर और वशीकरण का एक बहुत ज़्यादा ताक़तवर अमल यहां सबके फ़ायदे के लिए तालीम कर रहे हैं। इसे हर धर्म का मानने वाला आसानी से कर सकता है। इसमें कोई डर और ख़तरा नहीं है। जो लोग नमाज़ पढ़ना नहीं जानते, वे इन्टरनेट पर नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा सीख लें। नमाज़ के बहुत से वीडियोज़ और लेख मौजूद हैं। बाज़ार में भी हर ज़ुबान में नमाज़ का तरीक़ा सिखाने वाली किताबें मिल जाती हैं। इन्टरनेट से भी मुफ़्त में डाउनलोड की जा सकती हैं। इस अमल को हमने शैख़ अबुल हसन शाज़ली रहमतुल्लाह अलैह की किताब ‘सिर्रूल जलील’ के उर्दू तर्जुमे में पढ़ा है। उसी को हमने हिन्दी में अपने अल्फ़ाज़ में खोलकर आपके लिए आसान कर दिया है। शैख़ अबुल हसन शाज़ली रहमतुल्लाह अलैह एक बहुत बड़े आलिम और रूहानी बुज़ुर्ग थे। रूहानी इल्म के माहिर लोग उनके बुलन्द मर्तबे को ख़ूब अच्छी तरह जानते हैं। उनकी अरबी किताब ‘सिर्रूल जलील’ 800 साल से ज़्यादा पुरानी किताब है। कोई भी लड़का या लड़की इस अमल को किसी नाजायज़ मक़सद के लिए हरगिज़ न करे वर्ना सख़्त गुनाहगार होगा और किसी मुसीबत में फंस जाएगा। रूहानी अमल के ज़रिए अल्लाह से दुआ की जाती है और अल्लाह से किसी गुनाह और नाजायज़ काम की दुआ नहीं की जा सकती। सो इस अमल को सिर्फ़ जायज़ मक़सद के लिए और सही नीयत से ही करे। इन् शा अल्लाह मुराद पूरी होगी।
कहीं दो भाईयों या दो पार्टनरों में झगड़ा हो गया है। वहां दोस्ती और सुलह करनी है तो वहां इस अमल को करे। इसी तरह आप अपने बाॅस का दिल नर्म करने के लिए भी यह अमल कर सकते हैं। अगर आपकी ज़मीन पर किसी दबंग ने क़ब्ज़ा कर लिया है या आपकी रक़म किसी पर उधार है और वह लौटा नहीं रहा है तो आप वहां भी इस अमल से काम ले सकते हैं। ग़र्ज़ जहां कहीं भी टकराव, झगड़ा और दूरी हो, वहां आप इस अमल के ज़रिये मुहब्बत और दोस्ती पैदा कर सकते हैं।
किसी बहन को उसके भाई अपने बाप की जायदाद में हिस्सा न देते हों तो उसके लिए भी वह बहन यह अमल कर सकती है।
इसके अलावा भी आप कहीं निकाह के लिए पैग़ाम डालना चाहते हैं और लड़की भी तैयार है लेकिन उसके वालिदैन नहीं मान रहे हैं तो आप यह अमल कर सकते हैं। अगर लड़की तैयार नहीं है तो आप इस अमल को न करें। हरेक को अपनी आज़ादी का हक़ है। आप किसी पर रूहानी ताक़त इस्तेमाल करके उसकी आज़ादी ख़त्म नहीं कर सकते। ऐसी हालत में आप वैसी ही ख़ूबियों वाली लड़की से निकाह के लिए यह अमल कर सकते हैं। आप चाहें तो उसमें और ज़्यादा ख़ूबियों का इज़ाफ़ा कर लें। वैसी ही लड़की मिलने के असबाब ग़ैब से बनेंगे।
जिन लड़कियों के पास दहेज देने के लिए माल नहीं है। वे भी इस रूहानी अमल के ज़रिये के आसानी से अच्छा कमाऊ पति पा सकती हैं।
आपकी दुकान पर सेल कम होती है तो आप अपनी दुकान पर ग्राहक खींचने के लिए इस अमल को कर सकते हैं। कोई अपनी जाॅब में या किसी पाॅलिटिकल पार्टी में है और प्रमोशन पाना चाहता है या इलेक्शन के लिए टिकट चाहता है तो वह यह ज़बर्दस्त पाॅवरफ़ुल अमल कर सकता है।
आप कहीं नौकरी के लिए इन्टरव्यू देने वाले हैं तो आप उसमें कामयाबी के लिए भी यह अमल कर सकते हैं। तब अमल पढ़ते वक़्त आप यह तसव्वुर करें कि आपको सेलेक्शन लेटर दिया जा रहा है। जिस काम को करना हो, उसी के पूरा होने का तसव्वुर (कल्पना) करते हुए अमल पढ़े। मक़सद पूरा होने तक अमल करता रहे।
जो आयतें पढ़नी हैं, पहले उन्हें अच्छी तरह ज़ुबानी याद कर ले और उनका मतलब समझ ले। इनमें अल्लाह की क़ुदरत और मदद का ज़िक्र है। इसे समझने से आपका यक़ीन मज़्बूत होगा। आपका वक़्त बचेगा और आपको आसानी रहेगी। ‘हस्बुनल्लाहु व नेमल वकील’ का मतलब है कि हमें अल्लाह काफ़ी है और वह अच्छा काम बनाने वाला है।
युहिब्बूनहुम क-हुब्बिल्लाह वल्लज़ीना आमनू अशद्-दु हुब्बल्-लिल्लाह। -क़ुरआन 2ः165
तर्जुमाः उनसे ऐसी मुहब्बत करते हैं जैसी मुहब्बत अल्लाह से करनी चाहिए और जो ईमान वाले हैं उन्हें सबसे बढ़कर अल्लाह से मुहब्बत होती है।
लौ अन्फ़क़्ता मा फ़िल अर्ज़ि जमीअम्-मा अल्लफ़्ता बैइना क़ुलूबिहिम वला किन्नल्लाहा अल्लफ़ा बैइनाहुम इन्नहु अज़ीज़ुन हकीम। -क़ुरआन 8ः63
तर्जुमाः और उनके दिल आपस में जोड़ दिए, अगर तुम ज़मीन में जो कुछ है वह सब ख़र्च कर डालते तब भी उनके दिलों को आपस में न जोड़ सकते लेकिन अल्लाह ने उन्हें आपस में जोड़ दिया। यक़ीनन वह ज़बर्दस्त हिकमत वाला है।
व-अल्क़ैतु अलैइका महब्बतम् मिन्नी वलितुस्नआ अला ऐनी। -क़ुरआन 20ः39
तर्जुमाः और मैंने तुझ पर अपनी तरफ़ से मुहब्बत डाल दी और ताकि तू मेरे सामने परवरिश पाए।
इनमें क़ुरआन में से तीन जगह से आयतें ली गई हैं। हम उनका हवाला और उनका तर्जुमा लिख दिया है। जो लोग इन तीन आयतों को याद न कर पाएं, वे इन्हें देखकर भी पढ़ सकते हैं। जब अमल पढ़ें तो सिर्फ़ आयतें पढ़ें। इनका तर्जुमा न पढ़ें।


वशीकरण और मुहब्बत का वह ख़ास ताक़तवर अमल यह है-
अगर किसी को अपनी तरफ़ रूजू करना और मुहब्बत करना हो तो ‘हस्बुनल्लाहु व नेमल वकील’ को पढ़े। इसकी तरकीब यह है कि रात को सो जाए और आधी रात के वक़्त दो दो रकअत करके 6 रकअत नफ़िल नमाज पढ़े। पहली और दूसरी रकअत में सूरह फ़ातिहा के बाद 450 बार ‘हस्बुनल्लाहु व नेमल वकील’ पढ़े। दो रकअत नफ़िल नमाज़ पढ़ने के बाद सलाम फेर कर बैठे और ‘हस्बुनल्लाहु व नेमल वकील’ 950 बार पढ़े। आयतें पढ़ते वक़्त यह तसव्वुर करे कि ये आयतें उस आदमी को मेरी तरफ़ खींचकर ला रही हैं। मैं चुम्बक की तरह उसे अपनी तरफ़ खींच रहा हूँ जैसे चुम्बक लोहे को खींचता है। इस तसव्वुर से आपके अन्दर अट्रैक्शन पाॅवर बढ़ती चली जाएगी और वह आदमी आपकी तरफ़ खिंचा चला आएगा। दुआ और अमल की बुनियाद यक़ीन पर होती है। यक़ीन का पता आपके तसव्वुर से चलता है। अमल पढ़ने के दौरान और उसके बाद भी हमेशा अपने दिल में वही तसव्वुर करें जो कि आपकी दुआ है। आप चाहते हैं कि महबूब हाज़िर हो और मुहब्बत करे तो यही तसव्वुर करें कि वह खिंचा हुआ, मुहब्बत का इज़्हार करता हुआ आ रहा है। इसके बाद ये आयतें 7 बार पढ़े-
युहिब्बूनहुम क-हुब्बिल्लाह वल्लज़ीना आमनू अशद्-दु हुब्बल्-लिल्लाह। लौ अन्फ़क़्ता मा फ़िल अर्ज़ि जमीअम्-मा अल्लफ़्ता बैइना क़ुलूबिहिम वला किन्नल्लाहा अल्लफ़ा बैइनाहुम इन्नहु अज़ीज़ुन हकीम। व-अल्क़ैतु अलैइका महब्बतम् मिन्नी वलितुस्नआ अला ऐनी।
इसी तरह फिर दो रकअत पढ़े और उसके बाद आयतें पढ़े। फिर इसी तरह दो रकअत नमाज़ नफ़िल और आयतें पढ़े। उसके बाद फिर दो रकअतें और आयतें इसी तरह पढ़े। इस तरह कुल 6 रकअत नमाज़ नफ़िल पढ़े।

रोज़ ऐसे ही यह अमल करे। अल्लाह के हुक्म से जल्दी ही असर ज़ाहिर होगा। तब भी काम पूरा होने तक यह अमल पढ़ता रहे। यह इतना ज़्यादा क़ीमती और असरदार अमल है कि आप अन्दाज़ा नहीं लगा सकते। लोगों की ज़िन्दगी गुज़र जाती है लेकिन उन्हें सही अमल नहीं मिल पाता और अगर अमल सही मिल जाता है तो उन्हें सही तरीक़ा नहीं मिल पाता। यह आप सबको बिल्कुल मुफ़्त सिखाया जा रहा है ताकि आप अपने और दूसरों के मसले हल कर सकें और ख़ुश रह सकें और रब का शुक्र अदा कर सकें। शुक्रगुज़ार बनना ही इन्सान का सबसे बड़ा अमल है। यही ज़िन्दगी में ख़ुशी का राज़ है और यही इन्सान का मक़सद है। जो इल्म आपको दिया गया है, इसकी आप बहुत ज़्यादा क़द्र करें। इसी एक अमल से आपका हर काम हो जाएगा। आपको मुहब्बत ही नहीं, मालो दौलत और सेहत व इज़्ज़त भी बहुत मिलेगी।

Wednesday, September 21, 2016

Al-Fatiha Life Healing Energy मन की मुरादें पाएँ, यक़ीन की ताक़त से

17th July 2016, 8:52pm

रिसर्च : डा. अनवर जमाल


ईमेल:allahpathy@gmail.com

मनचाहा पति कैसे पाएँ?:Practical Training

मीना एक आफ़िस में चपरासी है। वह 8 साल पहले विधवा हुई थी। उसकी शादी के 3 साल बाद ही उसके पति की मौत हो गई थी। उसे अपने पति की मौत के बाद उसके आश्रितों में नौकरी मिल गई थी। तक़रीबन 4-5 सालों से वह सरकारी कागज़ इधर से उधर पहुंचा रही है। उसकी आँखों में ऐसा सूनापन और चेहरे पर ऐसी उदासी छाई रहती थी, जिसे देखकर मैं समझ गया कि इसके सपने मर चुके हैं।

मीना की उम्र ज़्यादा नहीं है। वह ख़ूबसूरत भी है। कोई ऐसी वजह नहीं है कि फिर से उसकी शादी न हो सके। जब कभी मेरी नज़र उस बहन पर पड़ती, मैं मालिक से उसकी शादी और उसके अच्छे भविष्य की दुआ ज़रूर करता।
एक रोज़ मैं अपने एक शागिर्द समर ख़ान से मिलने के लिए उनके आफ़िस गया तो सामने से मीना निकल
कर गई।

मैंने समर ख़ान से कहा कि आप इसकी शादी के लिए दुआ किया करें।

मालिक के करम से तभी मीना कुछ काग़ज़ात
रिसीव कराने के लिए समर ख़ान के आफ़िस में आ गई।
उनकी असिस्टेंट हेमा उससे बात करने लगी।
समर ख़ान  ने मीना को मेरी बात बताई कि हमारे भाई आपकी शादी के लिए दुआ करते रहते हैं।

मीना ने कहा कि मैं ख़ुद भी शादी करना चाहती हूं। मेरे रिश्ते आते हैं लेकिन फिर मेरा काम अटक जाता है। ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने मुझ पर कोई जादू वग़ैरह करवा दिया हो।

मैंने कहा कि मेरा ताल्लुक़ देवबन्द से है। मैं जादू-टोने की हक़ीक़त को ख़ूब जानता हूँ। आप पर जादू का असर तो है लेकिन ख़ुद पर यह असर आपका अपना   किया हुआ है।
वह बोली- कैसे?
मैंने कहा- आप चाहती हैं कि आपकी दोबारा शादी हो?
मीना बोली- हाँ
मैंने कहा- फिर आपको यह डर भी सताता है कि लोग क्या कहेंगे?
मीना बोली- हाँ
मैंने कहा- यही डर आपका काम अटका रहा है। आप इस डर को अपने दिल से निकाल दीजिए। आपका काम हो जाएगा। समाज के रिवायती लोग तो विधवाओं को तिल तिल करके मरते देखना चाहते हैं।
उनकी ख़ुशी के लिए अपनी ख़ुशियों का गला
घोंटना अक्लमन्दी नहीं है। अब औरतों को विधवा होने के बाद सती और बर्बाद की कोई ज़रूरत
नहीं है। मालिक की दया से आपकी शादी ज़रूर होगी और आपको अच्छा पति मिलेगा।
मीना ने पूछा कि मुझे क्या करना होगा?

मैंने उसे क़ुरआन की सबसे बड़ी दुआ अलफ़ातिहा के ज़रिए हीलिंग इनर्जी दी। ज़िन्दगी के बारे में उसके नज़रिए को सही किया। उसे अल्लाह की मदद का यक़ीन दिलाया।

मैंने कहा- आप उस मालिक को याद कीजिए, जिसने आपको पैदा किया है, जिसकी रहमत से आप ज़िन्दा हैं और हर पल साँस लेती हैं। वही एक रब सबका मालिक है। आप उसी मालिक की प्रॉपर्टी हैं और अपनी प्रॉपर्टी की केयर करना वह खूब जानता है। आप सोने से पहले उसका नाम लीजिए।

आप ‘सबका मालिक एक’ और ‘अल्लाह मालिक’ यह कहिए। उससे अपने काम में मदद   माँगिए। इसके बाद जैसा पति आपको चाहिए, उसके गुणों पर विचार कीजिए और उसका   स्वरूप, उसकी एक इमेज अपने मन में बनाईये।

अपने नए पति की उम्र, आमदनी, रंग, क़द, आदत और यह कि वह शहरी हो या देहाती, यह सब बिल्कुल साफ़ साफ़ सोच लीजिए। इसे किसी कार्ड पर लिखकर इसे अपने पास रख लीजिए। इसके बाद आप उस पति को अपने मन की आंखों से अपने घर में मौजूद देखिए। यह विचार लेकर आप सो जाईये और फिर सुबह को उठते ही यही विचार कीजिए। दिन में भी आप इस विचार को अपने में ताज़ा करती रहिए। आप यक़ीन कीजिए कि आपका सपना पूरा होगा।

मैं उसे यक़ीन दिलाते दिलाते ख़ुद इतना यक़ीन से भर गया कि मेरे मुँह से यह भी निकल गया कि 'मालिक ने चाहा तो एक हफ़्ते में आपका काम हो जाएगा।'

...और वाक़ई एक हफ़्ते में उसका काम हो गया।
19 नवम्बर 2014 को नन्हे भाई ने ख़बर दी कि मीना ने 18 नवम्बर को एक लड़के के साथ कोर्ट मैरिज कर ली है। दोनों पक्षों की तरफ़ से उनका कोई भी घरवाला शामिल नहीं हुआ।

मैं ख़ुश हुआ कि दोनों पक्षों की तरफ़ से कोई शामिल नहीं हुआ, न सही लेकिन मीना की नैया पार लग गई। जो काम 8 साल से अटका पड़ा था, वह अल्लाह की मदद से 8 दिन में हो गया। 

मीना 20 नवम्बर 2015 को अपनी माँग में सिन्दूर लगाकर आई। उसका चेहरा ख़ुशी और   मेक अप, दोनों की वजह से लाल हो रहा था। उसने कीमती साड़ी  ज़ेवर पहन रखे थे।   उसने मुझे, समर ख़ान को और हेमा को बरफ़ी खिलाई। उसका चेहरा खिला हुआ था। उसने बताया कि भाई साहब, मैंने जिस दिन दुआ की उससे अगले दिन ही रिश्ता आ गया था। मेरे पति बहुत सुन्दर हैं। वह सरकारी जॉब में तीसरे ग्रेड पर हैं। उसने अपने मोबाईल में अपने नए पति का फ़ोटो दिखाया। वाक़ई वह एक अच्छी शक्ल का नौजवान है।
मीना बोली- आपका बहुत बहुत शुक्रिया।
मैंने कहा- अब तो हमारे काम की शुरूआत हुई है। अब हम तुम्हें बहुत से बच्चों का वरदान देते हैं। कम बच्चों की बात कभी मत सोचना। बच्चे जितने ज़्यादा हों, उतना ही अच्छा है। सोचना कि पूरा शहर तुम्हारे बच्चों से भर गया है। तुम्हारे पास दौलत बहुत आएगी।
मीना मुस्कुरा कर सुनती रही।
मैंने यह भी कहा- अपने पति को बचा कर रखना।   जब कभी उसके पास तुम्हारे रिश्तेदार बैठें तो वहां मौजूद रहना। कुछ ग़लत क़िस्म के रिश्तेदार ग़लत बातें कह जाते हैं और रिश्ता बिगाड़ देते हैं।
मीना ने हामी भरी और अपने आफ़िस वालों को मिठाई खिलाने चली गई।

मालिक हरेक लड़की को,  हरेक विधवा और तलाक़शुद औरत को ज़्यादा से ज़्यादा सुख दे और उनके दिल से दुनिया का डर निकाल दे, जिसने उनका जीवन दुखों से भर दिया है।
अक्सर डर बेकार होते हैं। यह सपने साकार होने की दुनिया है।
आप सपने देखिए, उनके पूरा होने का यक़ीन कीजिए।
अपने मन, वचन और कर्म से अपने सपनों को सपोर्ट कीजिए।
समय आने पर वह सहज ही पूरा हो जाएंगे।
यह ईश्वर अल्लाह की प्राकृतिक व्यवस्था है।
कुंवारी लड़कियां भी इसी विधि से अच्छा पति पा सकती हैं। उन्हें अपने मन से यह डर निकाल देना चाहिए कि उनके पास देने के लिए बहुत सा दहेज नहीं है या उनका क़द छोटा है या उनका रंग सांवला है या उनकी एजुकेशन कम  है, इसलिए उन्हें अच्छा पति नहीं मिलेगा।
दिल से हरेक डर निकाल देने के बाद अच्छे पति के बारे में सोचिए कि आपकी नज़र में एक   अच्छे पति में क्या गुण होने चाहिएं और फिर अपने मन में उसके साथ अपना विवाह होते हुए   देखिए, बस। हो गया काम।
एक आसान काम को बेवजह के डर ने इतना मुश्किल बना दिया है कि बहुत सी लड़कियां उस आदमी से शादी कर बैठती हैं, जिसकी सूरत और सीरत को वे पसन्द नहीं करतीं।

औरत हो या मर्द, कोई बूढा हो या बच्चा या फिर चाहे कोई ग़रीब  हो या बीमार, उसे  अपनी हक़ीक़त और अपने अंदर की शक्ति को  पहचानना होगा। अपनी सही पहचान के बाद उसे सारी ख़ुशियां आसानी से मयस्सर होती चली जाएंगी।
पिछले 30 सालों में हमने अपने बुज़ुर्गों की ज़िन्दगी में, अपनी और अपने दोस्तों की ज़िन्दगियों में अल्लाह की क़ुदरत के ऐसे सैकड़ों चमत्कार और मौज्ज़े देखे हैं। सैकड़ों लोगों को हम रोज़ वेलनेस कोचिंग देते हैं। अल्लाह उनकी भी मुरादें पूरी करता  है। वह उनके भी बिगड़े काम बनाता है। 
सब कुछ सही जानकारी और उस पर यक़ीन व अमल पर 


मन की मुरादें पाएँ, यक़ीन की ताक़त से
जब इंसान के दिल में किसी चीज़ की ख़्वाहिश बार बार गश्त करती है तो वह मुराद बनकर उसके मन में क़ायम हो जाती है।

यह पहला मरहला होता है
यह एक Vision होता है

दूसरा मरहला यक़ीन का होता है।
जब आदमी को यक़ीन होता है कि यह चीज़ मिल सकती है तो वह उसे पाने के रास्ते और ज़रिये तलाश करता है, अंदरूनी और बाहरी कोशिश करता है। नतीजे में उसका conscious mind उस चीज़ पर focus हो जाता है। वह ख़ुद को उस चीज़ के साथ देखता है।

मानो वह चीज़ उसके पास इसी वक़्त मौजूद है।
इस तरह की images उसके mind में बार बार बनती हैं तो वे subconscious mind में commands की तरह दाख़िल हो जाती हैं।

जिस चीज़ पर conscious mind फोकस हो जाता है subconscious mind उसे attract कर लेता है, या उसे पाने के साधनों को, means को attract कर लेता है।

तीसरा मरहला चीज़ पा लेने का मरहला है।
जब चीज़ ज़ाहिरी दुनिया में पास आ जारी है तब मुराद पूरी हो जाती है। हर मुराद ऐसे ही पूरी होती है। अल्हम्दुलिल्लाह



जिस चीज़ के मिलने के बारे में आदमी को शक हो जाता है, तो मन की मुराद पूरी होने री natural process रुक जाती है और तीसरा मरहला नहीं आता।  वह चीज़ physical world में ज़ाहिर नहीं हो पाती।

शक,  दरअसल यक़ीन होता है चीज़ के न मिलने का।

हर आदमी बचपन से एक ख़ास तरह के माहौल में चीज़ों को होता हुआ देखता है। इससे उसका एक 'यक़ीन' बन जाता है की कौन सी चीज़ हो सकती है और कौन सी चीज़ नहीं हो सकती।

हर इंसान को उसकी ज़िन्दगी में उसके यक़ीन के मुताबिक़ ही चीज़ें मिलती है।

इंसान अपने यक़ीन से unconscious है, unaware है।  उसका यक़ीन माहौल के असर से ख़ुद ब ख़ुद बन चुका होता है। अक्सर उसे अपने साथ 'कुछ बुरा' होने का डर लगा रहता है।

क्यों ?
...क्योंकि वह दूसरों के साथ 'बुरा' होते हुए देखता है और उसके साथ भी कुछ बुरा हो चुका होता है।

इससे उसका एक यक़ीन बन जाता है की यह दुनिया एक ऐसी जगह है जहाँ ज़िन्दगी में कभी भी 'कुछ बुरा' हो सकता है।  इस यक़ीन की वजह से उसके साथ 'कुछ बुरा' होता रहता है।


उसके साथ 'कुछ बुरा' होते देखकर दूसरे लोगों को भी यक़ीन हो जाता है कि इस दुनिया में किसी के साथ कभी भी 'कुछ बुरा' हो सकता है।

उनके इस यक़ीन की वजह से उनके दिल में डर पैदा होता है कि 'फुलां' आदमी के साथ ऐसा हुआ, कहीं ऐसा हमारे साथ हो गया तो क्या होगा ?

बीमारी, accident, और नौकरी छिन जाने के वाकेआत देख कर वह खुद के बीमार, ज़ख़्मी या jobless होने की तस्वीरें अपने मन में देखने लगते हैं।

सब का मन बेक़ाबू है। सबके मन में डर है। किसी के मन में एक तरह का डर है और किसी के मन में दूसरी तरह का डर है। आज डर और ग़म इंसान के वुजूद में समा चुके हैं।

अक्सर इंसान ऐसी बातों से डरता है, जो शायद उसके साथ कभी न हों, लेकिन अपने डर की वजह से वह उन्हें अपनी ज़िन्दगी में वुजूद बख़्श देता है।

जहाँ डर होता है, वहाँ ग़म ज़रूर होता है।

जहाँ ग़म होता है, वहाँ ग़ुस्सा, मायूसी, बेचैनी और शिकायतें भी होती हैं।


जहाँ ग़ुस्सा और शिकायतें होती हैं।

वहाँ लड़ाई - झगड़े भी होते हैं।

जहाँ लड़ाई - झगड़े होते हैं, वहाँ नफ़रत भी होती है।

जहाँ दूसरों से नफ़रत होगी वहाँ दूसरों का बुरा चाहने की बात भी ज़रूर पायी जाएगी। 
जब आदमी ग़म, ग़ुस्से और नफ़रत से भरा होगा और दिल से अपने दुश्मनों का बुरा चाहता होगा तो उसके दिल में बुराई बैठ जाएगी। वह बुराई ख़ुद उसके वुजूद का, उसके being का हिस्सा बन जाती है। तब उसके अपने ही साथ बुरे हादसे और नुक़्सान ख़ुद ब ख़ुद होने लगते हैं।

जब वह अपने बारे में कुछ बुरा होने से डरता है, तब भी उसके साथ कुछ बुरा हो जाता है।

आदमी नहीं जानता कि उसके मन के बेक़ाबू होने से उसका डर, ग़म, ग़ुस्सा और नफ़रत सब कुछ बेक़ाबू है।

आदमी को जब ख़ुद पर ही क़ाबू नहीं है तो उसे अपने काम और उसके अंजाम पर भी क़ाबू नहीं हो सकता।

बुराई का अंजाम बुरा होता है।

बुरे अंजाम से बचना है तो भलाई को चुनें।

बुराई को भलाई से बदलें।

जब आपको अपने साथ कुछ बुरा होने का डर सताए तब अल्लाह की ख़ूबियों को याद करें, जिसने आपको 'अलक़' से पैदा किया। जिसने ज़मीनो-आसमान की हर चीज़ को पैदा किया। उनकी हिफाज़त की है और कर रहा है। जिसने सय्यिदना नूह अ0 की नाव की हिफाज़त की, जिसमें हमारे बुजुर्ग़ सवार थे। वे बुजुर्ग़ न बचते तो आज यहाँ हम भी न होते।

जब हमारी हिफाज़त के लिए अल्लाह हमारे साथ है तो हम अल्लाह के सिवा किसी ऐसी चीज़ से क्यों डर रहे हैं, जिससे डरने के लिए अल्लाह ने मना किया है ?

हम ऐसा ग़म क्यों कर रहे हैं, जिससे अल्लाह ने रोका है ?

हम इस बात पर ख़ुश क्यों नहीं होते कि अल्लाह हमारे साथ है, जो हर चीज़ पर क़ादिर (समर्थ) है।

वह रब हमारा भला करना चाहे तो कोई हमारा बुरा नहीं कर सकता और अगर वह हमारा कुछ नुक़्सान करना चाहे तो कोई हमें नफ़ा नहीं पहुँचा सकता।

... और अल्लाह जिसके साथ जो कुछ करता है, अपने क़ानून के मुताबिक़ करता है।

अल्लाह का क़ानून यह है कि जो लोग भलाई के काम करते हैं, उन्हें भलाई ही नसीब होती है। 
आप अपने यक़ीन के मुताबिक़ ही अमल करते हैं।
आपके आमाल भी आपके यक़ीन के मुताबिक़ ही कामयाब होते हैं।
आपका यक़ीन, आपके आमाल और उनके अंजाम हर जगह काम करते हैं। आख़िरत में भी और उससे पहले दुनिया में भी। 
आपको आपके यक़ीन के मुताबिक़ ही मिलता है और मिलेगा।

अब यह बात हर तरफ़ कही जा रही है कि अगर आप कहते हैं ‘I can’ तो आप सच कहते हैं, अगर आप कहते हैं ‘I cannot’ तो भी आप सच कहते हैं।
ख़ुद  के बारे में आपका जो भी यक़ीन है, वह सामने आता है।  
ख़ुद के बारे में आप अपना यक़ीन अच्छा बनाएं।

आपके मन में बचपन से माहौल के असर से जो यक़ीन ख़ुद ब ख़ुद बनता चला आया है, उसने आपके अपने बारे में भी आपका एक यक़ीन बना दिया है कि आप कैसे आदमी हैं ?

आप कैसी चीज़ें, कैसी सेहत, कितनी इज़्ज़त, कितनी दौलत और कितनी ख़ुशी और कामयाबी पाने के 'हक़दार' हैं ?

आपके मन की जो मुरादें आपके इस यक़ीन के मुताबिक़ होती हैं, वे ज़रूर पूरी होती हैं।


आम तौर पर आदमी की ज़िन्दगी में ऐसे वाक़ये हुए होते हैं कि उसने किसी के साथ बुरा किया होता है, या उसके साथ किसी ने बुरा किया होता है।

वह ख़ुद एहसासे जुर्म और शर्मिंदगी के साथ जीता है।

वह अपने आपको अच्छा आदमी नहीं मानता।

उसके अन्दर ख़ुद से नफ़रत का जज़्बा होता है।

यह जज़्बात उसके अन्दर सज़ा का तक़ाज़ा करते हैं और उसका subconscious mind उसके लिए ऐसे बुरे हालात पैदा करता है जिनसे वह दुःख दर्द महसूस करता है।

आदमी इस बात unconscious रहता है कि अपने आपको वह ख़ुद जज कर रहा है और ख़ुद को ख़ुद ही सज़ा दे रहा है और यह कि वह जब चाहे अपने आपको माफ़ कर सकता है। वह जब चाहे ख़ुद पर रहम कर सकता है।

self compassion से वह अपने हालात बदल सकता है।

वह जब चाहे self-concept बदल सकता है।

वह जब चाहे अपने अक़ीदे, अपने beliefs बदल सकता है।

जिस बात को आप सच मानते हैं वह आपका belief है।

आपका belief system ही आपका paradigm है।
आपका paradigm आपके कल्चर की देन है।

आप अपनी मुराद पूरी होने पर यक़ीन या शक भी अपने paradigm के मुताबिक़ ही करते हैं।


अगर आप कोई चीज़ चाहते हैं और वह, आपको काफ़ी वक़्त गुज़रने के बाद, अभी तक नहीं मिली है तो इसका मतलब यह है कि आपका paradigm आपकी मुराद को support नहीं कर रहा है।

आपको अपना paradigm चेंज करना होगा।

paradigm चेंज होता है, नई ख़बरों से।

नई जानकारी हासिल करें ताकि आपका मन नई जानकारी को process करके नए नतीजों का यक़ीन कर सके।

ऐसे लोगों के साथ रहें या उनके बारे में पढ़े, जिन्होंने इन चीज़ों को हासिल किया है। उनके तरीक़ों को आज़माएं।

कुछ महीनों तक लगातार ऐसा करते रहने से paradigm चेंज हो जाता है।

आपके self respect और self worth महसूस करने के लिए ख़ुद को ख़ुदा की नज़र से देखें।

अल्लाह ने सय्यिदना आदम अ0 की औलाद को इज़्ज़त बख़्शी है।

जुर्म के एहसास की वजह से shame & guilt के जज़्बात हों,  ख़ुद से घिन आती हो तो तौबा करके इन्हें ख़ुद से दूर कर लें।


अपना नज़र, दिल, बदन, लिबास और जगह को पाक रखें।

अल्लाह तौबा करने वालों को और बहुत पाक रहने वालों को महबूब रखता है।

सो अपने आप से, आप ख़ुद भी मुहब्बत करें।


दूसरों को माफ़ करना सीखें।
ख़ुद को माफ़ करना भी सीखें।

आज तक जो कुछ बुरा आपने किसी के साथ किया या किसी ने आपके साथ किया वह सब आपके लिए एक सबक़ था। जो सबक़ आपको सीखना था वह आप सीख चुके हैं। अब उन दुख देने वाली यादों को मन में दोहराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

अल्लाह ने आपको तौबा की तौफ़ीक़ दी, इस पर शुक्र अदा करें।

ज़मीन से लेकर आसमान तक अल्लाह ने हर चीज़ को आपको नफ़ा पहुंचाने में लगा रखा है।

हर तरफ़ से आप हर पल बेशुमार नेमतों से घिरें हुए हैं। आप नेमतों को देखिये, उनका बयान कीजिये, उन पर शुक्र अदा कीजिये।

सुबह को सबसे पहला अमल शुक्र का कीजिए।
रात को सोने से पहले सबसे आख़री अमल शुक्र का कीजिए।

दिन में भी आप बार बार नेमतों पर शुक्र कीजिए।
आपके शुक्र के एहसास को कितनी शिद्दतसे महसूस करेंगे, उतनी जल्दी आपको बरकत हासिल होगी।

शुक्र का मतलब यह भी है कि ज़िन्दगी की और नेमतों की क़द्र की जाए। उनकी केयर की जाए। उनका इस्तेमाल हमेशा भलाई में किया जाए।

इस अमल से आपकी state of consciousness ही चेंज हो जाती है।

जब आप अपने being पर काम करते हैं तो उसका असर आपके doing पर पड़ता है, और फिर having पर भी पड़ता है।

आपके मन की मुराद पूरी हो जाती है।

अगर आपको health चाहिए तो आपको health consciousness डेवलप करनी होगी।

अगर आपको wealth चाहिए तो आपको wealth consciousness डेवलप करनी होगी।

अगर आपको power चाहिए तो आपको power consciousness डेवलप करनी होगी।
अगर आपको success चाहिए तो आपको success consciousness डेवलप करनी होगी. 

अगर आपके ख़ुशी चाहिए को आपको ख़ुशी की consciousness डेवलप करनी होगी।

आपको जो चीज़ दरकार है, आपको ख़ुद में उसी चीज़ की consciousness डेवलप करनी होगी।

इसका तरीक़ा imagination है, जिसे creative visualization भी कहते हैं।  यह पूरी तरह scientific है।

participant बनकर मन चाही चीज़ या हालत को मन में देखना और उसे sound, taste, touch और smell के साथ real feel करना उस चीज़ या हालत की consciousness को develop करता है।


यह बीज बोने की तरह है।
जो बीज आप आज बो रहे हैं, future में आप उनकी फ़सल ही काटेंगे।

आप अंजीर बोएंगें तो अंजीर की फ़सल ज़रूर मिलेगी।

आपके पास 'आज' है, 'अब' है और 'यहाँ' है।

आप 'आज अब यहाँ' जो कर रहे हैं, उससे कुछ बन रहा है।

आप 'आज अब यहाँ' ख़ुद को जैसा feel कर रहे हैं, future में आप वैसे ही बन जायेंगे।

इंशाअल्लाह

Quantum physics कहती है कि आपके देखने का असर energy पर पड़ता है।

जिस चीज़ को आप देख रहें हैं आप उसे जन्म दे रहे हैं।

आप energy को जानिए,
आप अपने मन को जानिए

अपने मन में डूबकर पा जा सुराग़ ए ज़िन्दगी 
तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

अल्लामा इक़बाल रह0

Allahpathy क़ुरआन से इलाज करने के बदले माल लेने के बारे में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का हुक्म और उनके सहाबा रजि़. का तरीक़ा



इमाम इब्ने क़य्यिम रहमतुल्लाहि अलैह लिखते हैं-
इमाम बुख़ारी रहमतुल्लाहि अलैह और इमाम मुस्लिम रहमतुल्लाहि अलैह ने सहीहैन में हज़रत अबू सईद ख़ुदरी रजि़यल्लाहु अन्हु से रिवायत की है। उन्होंने बयान कियाः
नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सहाबा की एक जमात एक सफ़र में निकल पड़ी। सफ़र करते करते अरब के एक क़बीले में उतरे और उनसे मेज़बानी क़ुबूल करने की दरख़्वास्त की। उन्होंने मेज़बानी क़ुबूल करने से इन्कार कर दिया। इतने में उनके सरदार को डंक लगा। उन्होंने हर मुमकिन तदबीर कर डाली मगर कोई तदबीर कारगर साबित न हुई। उस क़बीले के बाज़ लोगों ने कहा कि यह क़ाफि़ला जो तुम्हारे यहां आया है उनके पास चलो। शायद उनमें से किसी के पास कोई तदबीर हो।
चुनांचे वे सहाबा ए रसूल स. के पास आए और उनसे कहा-‘ऐ क़ाफि़ले के लोगो! हमारे सरदार को डंक लग गया और हर मुमकिन तदबीर हमने कर डाली मगर कुछ फ़ायदा न हुआ। क्या तुम में से किसी के पास इसका इलाज है?
उनमें से बाज़ ने कहा कि हाँ, अल्लाह की क़सम मैं झाड़ फूंक करता हूँ, मगर ज़रा सोचो कि हमने तुमसे मेहमानदारी करने की दरख़्वास्त की तो तुम लोगों ने हमारी इस दरख़्वास्त को ठुकरा दिया और हमारी मेज़बानी न की। मैं दम उस पर उसी वक़्त कर सकता हूँ, जब तुम उस पर कुछ उजरत मुक़र्रर करोगे।
चुनाँचे भेड़ों की एक तादाद पर मामला तय हो गया। उन्होंने उस पर ‘अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन’ पढ़ते हुए दम करना शुरू किया। उसका असर यह हुआ कि वह ऐसा चंगा हो गया गोया कि उसे किसी बन्धन से रिहाई मिली हो और वह चलने फिरने लगा। उसे कोई तकलीफ़ न थी। फिर उसने कहा कि इन लोगों को उनकी तयशुदा पूरी पूरी उजरत दे दो। चुनाँचे उन्होंने उजरत दे दी।
उसमें बाज़ सहाबा ने कहा कि आपस में इसे बाँट लो। इस पर दम करने वाले शख़्स ने कहा कि जब तक हम रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास न पहुँच जाएं, उस वक़्त तक कुछ न करो और हम आपके हुक्म के मालूम हो जाने तक उससे तवक़्क़ुफ़ करेंगे। चुनाँचे सब लोग रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए और उन्होंने पूरा वाक़या बयान किया।
यह सुनकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि तुमने ठीक ही किया। अब इसे आपस में बाँट लो और इसमें मेरा भी एक हिस्सा लगाना।’
-तिब्बे नबवी पेज 218 व 219 उर्दू तर्जुमाः हकीम अज़ीज़ुर्रहमान आज़मी
उर्दू से हिन्दी अनुवादः डा. अनवर जमाल यूसुफ़ ज़ई

अल्लाह की मदद रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में भी माँगिए
कामयाबी का नतीजा बहुत जल्दी आता है। कभी कभी तो फ़ौरन ही नतीजा आ जाता है। यह सब आपके यक़ीन पर है। जैसा कि आपने सहाबा रज़ि. के वाक़ये में देखा है।
अलफ़ातिहा के ज़रिये आप हर तरह के मामलों में अल्लाह से मदद मांग सकते हैं। आप रोज़मर्रा के घरेलू मामलों में भी अल्लाह से मदद मांग सकते हैं।
हमारी वाईफ़ अक्सर इस शक्तिशाली दुआ के ज़रिये अपने मामलों में अल्लाह की मदद पाती रहती हैं। जब हमारे बेटे अब्दुल्लाह ख़ान दो साल के हुए तब वह प्रेग्नेंट थीं। वह अब्दुल्लाह का दूध छुड़ाना चाहती थीं लेकिन अब्दुल्लाह ख़ान किसी तरह भी माँ का दूध छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे।
हमारी वाईफ़ ने हमसे पूछा कि क्या करूँ?
हमने कहा कि अल्लाह से मदद माँगो।
उन्होंने रात का इस बरकत वाली दुआ के ज़रिये मदद माँगी कि अब्दुल्लाह ख़ान माँ का दूध छोड़ दें।
उन्होंने इस दुआ की इस आयत को बहुत ज़्यादा रिपीट किया-
‘इय्याका ना‘बुदु व इय्याका नस्तईन’
यानि हम आप ही की इबादत करते हैं और आप ही से मदद चाहते हैं।
सुबह को अल्लाह ने अपनी क़ुदरत का यह करिश्मा दिखाया कि अब्दुल्लाह ख़ान ने माँ का दूध छोड़ दिया।
जो काम नामुमकिन दिख रहा था। वह बहुत आसानी से हो गया।
अल्लाह का शुक्र है।

अल्लाह से मदद माँगने और पाने का बहुत आसान तरीक़ा
1. आप जो भी मुराद पाना चाहें, उसे किसी काग़ज़ पर लिखकर अपने पास रख लीजिए। इससे आपके मन में यह साफ़ हो जाएगा कि आप क्या चाहते हैं?
इसके बाद आप दुनिया की सबसे बड़ी दुआ अलफ़ातिहा 41 बार पढ़कर अल्लाह से मदद माँगिए।
आप किसी भी वक़्त इस दुआ को पढ़ सकते हैं। सबसे अच्छा वक़्त सुबह की अज़ान के आस पास का वक़्त है जो कि सूरज निकलने से डेढ़-दो घंटा पहले होता है। इस वक़्त दिल में सुकून होता है। कन्सन्ट्रेशन ज़्यादा होता है।

इस आयत को इसका मतलब समझकर यक़ीन के साथ चलते फिरते हुए भी ज़्यादा से ज़्यादा पढ़िए-‘इय्याका ना‘बुदु व इय्याका नस्तईन’
यानि हम आप ही की इबादत करते हैं और आप ही से मदद चाहते हैं।

अगर आपमें से कोई इस दुआ को पढ़ नहीं सकता तो वह मोबाईल में इन्टरनेट से क़ुरआन की यह दुआ डाउनलोड करके इयरफ़ोन के ज़रिए सुन ले।
कम से कम 41 बार सुने। इससे ज़्यादा सुने तो और ज़्यादा फ़ायदा होगा। नेगेटिव इनर्जी दूर होगी और पाॅज़िटिव इनर्जी बढ़ेगी। इससे आपकी मुराद ज़्यादा जल्दी पूरी होगी।

2. सिर्फ़ एक रब की ताक़त पर और उसकी रहमत पर पूरा यक़ीन रखें कि वह आपके साथ है और आपकी दुआ का जवाब हमेशा ‘हाँ’ में देता है। जिस रब ने आपको ज़मीनो आसमान दिया, परिवार और रिश्ते दिए, रूह और जिस्म दिए, बेशुमार नेमतें दीं, सबसे बड़ी दुआ दी। वह आपको आपके मन की मुराद ज़रूर देगा।

आप सब्र के साथ अपना यक़ीन बनाए रखें। आपका यक़ीन ही वह ताक़त है जो अल्लाह की ग़ैबी मदद को अट्रैक्ट करता है। बहुत जल्दी आपको रास्ते खुलते हुए नज़र आएंगे। कभी कभी तो काम ही तैयार हो कर सामने आ जाता है। शक न करें कि कैसे होगा या कब होगा?

3. आप अपने काम के बारे में जो भी जायज़ कोशिश कर सकते हैं, ज़रूर करें और अगर कुछ नहीं कर सकते तो रास्ते खुलने का इन्तिज़ार करें।  

कोई बात पूछनी हो तो आप हमें ईमेल कर सकते हैं, काॅल कर सकते हैं। 
email: allahpathy@gmail.com